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Shiv Chalisa भगवान Lord Shiva को समर्पित एक अत्यंत प्रसिद्ध और शक्तिशाली स्तुति है। इस चालीसा का पाठ करने से भक्तों को मानसिक शांति, साहस और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
भारत में लाखों भक्त प्रतिदिन शिव चालीसा का पाठ करते हैं। विशेष रूप से सोमवार के दिन और पवित्र पर्व Maha Shivaratri पर शिव चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
इस लेख Shiv Chalisa in Hindi में आप शिव चालीसा के सम्पूर्ण बोल पढ़ सकते हैं और इसके लाभों के बारे में भी जान सकते हैं।
शिव चालीसा (Shiv Chalisa Lyrics in Hindi)
दोहा
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥
चौपाई
जय गिरिजापति दीन दयाला।
सदा करत संतन् प्रतिपाला॥
भाल चंद्रमा सोहत नीके।
कानन कुंडल नागफनी के॥
अंग गौर शिर गंगा बहाये।
मुण्डमाल तन छार लगाये॥
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे।
छवि को देख नाग मुनि मोहे॥
मैना मातु की है दुलारी।
बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी।
करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥
नंदी गणेश सोहैं तहँ कैसे।
सागर मध्य कमल हैं जैसे॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ।
या छवि को कहि जात न काऊ॥
देवन जबहिं जाय पुकारा।
तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥
कियो उपद्रव तारक भारी।
देवन सब मिलि तुमहि जुहारी॥
तुरत षडानन आप पठायो।
लव निमेष महँ मारि गिरायो॥
आप जलंधर असुर संहारा।
सुयश तुम्हार विदित संसारा॥
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई।
सबहि कृपा कर लीन बचाई॥
किया तपहिं भागीरथ भारी।
पुरी प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥
दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं।
सेवक स्तुति करत सदा ही॥
वेद नाम महिमा तव गाई।
अकथ अनादि भेद नहि पाई॥
प्रगट उदधि मंथन में ज्वाला।
जरत सुरासुर भए बिहाला॥
कीन्ह दया तहँ करी सहाई।
नीलकंठ तब नाम कहाई॥
पूजन रामचंद्र जब कीन्हा।
जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर।
भए प्रसन्न दिए इच्छित वर॥
जय जय जय अनंत अव्यक्ता।
कृपा करो त्रिपुरारी भक्त॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै।
भ्रमित रहौं मोहि चैन न आवै॥
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो।
यह अवसर मोहि आन उबारो॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो।
संकट से मोहि आन उबारो॥
मात पिता भ्राता सब कोई।
संकट में पूछत नहि कोई॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी।
आय हरहु मम संकट भारी॥
धन निर्धन को देत सदा ही।
जो कोई माँगे सो फल पाही॥
स्तुति कहि विधि करौं तुम्हारी।
क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥
शंकर हो संकट के नाशन।
विघ्न विनाशन मंगल कारण॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं।
नारद शारद शीश नवावैं॥
नमो नमो जय नमः शिवाय।
सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥
जो यह पाठ करे मन लाई।
ता पर होत है शम्भु सहाई॥
दोहा
नित नेम करि प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा।
तुम मेरी मन कामना, पूर्ण करो जगदीश॥
शिव चालीसा पढ़ने के लाभ
Shiv Chalisa का नियमित पाठ करने से भक्तों को कई आध्यात्मिक और मानसिक लाभ प्राप्त होते हैं।
मुख्य लाभ:
- मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है
- जीवन की बाधाएँ और संकट दूर होते हैं
- भगवान Lord Shiva की कृपा प्राप्त होती है
- आत्मविश्वास और मानसिक शक्ति बढ़ती है
- नकारात्मक विचारों और भय से मुक्ति मिलती है
बहुत से भक्त सोमवार के दिन शिव चालीसा का पाठ विशेष रूप से करते हैं।
Understand Shiv Chalisa Better
शिव चालीसा पढ़ने का सही समय
शिव चालीसा का पाठ किसी भी समय किया जा सकता है, लेकिन कुछ समय विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं:
- सुबह स्नान के बाद
- सोमवार (Somvar) के दिन
- Maha Shivaratri के पावन अवसर पर
- पूजा या ध्यान के समय
यदि श्रद्धा और भक्ति के साथ पाठ किया जाए तो इसका प्रभाव और भी अधिक माना जाता है।
Shiv Chalisa Hindi PDF
कई भक्त रोज़ पाठ करने के लिए शिव चालीसा का PDF डाउनलोड करना पसंद करते हैं — आप भी नीचे दिए गए बटन से आसानी से डाउनलोड करें।
आप इस पेज को बुकमार्क कर सकते हैं या इसका PDF बनाकर अपने मोबाइल में भी रख सकते हैं।
FAQ – Shiv Chalisa in Hindi
क्या शिव चालीसा हिंदी में पढ़ सकते हैं?
हाँ, भक्त अपनी भाषा में शिव चालीसा पढ़ सकते हैं। भगवान Lord Shiva के लिए भक्ति सबसे महत्वपूर्ण होती है।
शिव चालीसा कितनी बार पढ़नी चाहिए?
अधिकतर भक्त इसे दिन में एक बार पढ़ते हैं। कुछ लोग विशेष मनोकामना के लिए इसे 11 या 108 बार भी पढ़ते हैं।
क्या सोमवार को शिव चालीसा पढ़ना शुभ है?
हाँ, सोमवार भगवान शिव का दिन माना जाता है। इस दिन शिव चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।



