Shiv Chalisa in Sanskrit lyrics prayer of Lord Shiva
Shiv Chalisa in Sanskrit lyrics prayer of Lord Shiva

Shiv Chalisa in Sanskrit – Lyrics, Meaning & Benefits

Shiv Chalisa in Sanskrit

शिव चालीसा भगवान शिव की महिमा का वर्णन करने वाला एक अत्यंत पवित्र स्तोत्र है। “चालीसा” शब्द का अर्थ है चालीस चौपाइयों का समूह, जिसमें भगवान शिव की करुणा, शक्ति और भक्तों पर उनकी कृपा का गुणगान किया गया है।

संस्कृत भाषा में शिव चालीसा का पाठ करने से इसकी आध्यात्मिक गहराई और अधिक अनुभव की जा सकती है। संस्कृत को देववाणी माना जाता है, और इसमें की गई प्रार्थना का विशेष महत्व होता है। भगवान शिव को त्रिपुरारी, नीलकंठ और महादेव के रूप में पूजा जाता है।

नियमित रूप से शिव चालीसा का पाठ करने से मन की शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। संस्कृत में इसका उच्चारण करने से भक्तों को दिव्यता का विशेष अनुभव होता है।

Shiv Chalisa in Sanskrit Lyrics

दोहा

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥

चालीसा (चत्वारिंशत् श्लोकाः)

जय गिरिजापति दीनदयालः।
सदा करत् सन्तजनप्रतिपालः॥

भालचन्द्रः शोभते नीके।
कर्णकुण्डल नागफणि के॥

अङ्ग गौरं शिर गङ्गा वहति।
मुण्डमाल तनु भस्म विभूषितः॥

व्याघ्रचर्माम्बरं शोभते।
दृश्यते नागमुनि मोहते॥

मैनामाता प्रिया सुतः।
वामभागे शोभते सुभः॥

करत्रिशूलं शोभते भारी।
शत्रुनाशक सदा सुखकारी॥

नन्दी गणेश समीप विराजे।
सागर मध्ये कमल सम साजे॥

कार्तिकेय सहित गणरावः।
एषा छवि कथनातीत भावः॥

देवाः यदा कृतवन्तः पुकारम्।
तदा हरिः हरति दुःखभारम्॥

तारकासुरं हतवान् त्वम्।
देवैः स्तुतः भवसि नित्यम्॥

षडाननं प्रेषितवान् त्वम्।
क्षणेन तं संहृतवान् त्वम्॥

जलन्धरासुरं विनाशितवान्।
तव यशः सर्वत्र प्रसिद्धम्॥

त्रिपुरासुरसं युद्धमकार्षीः।
भक्तान् रक्षितवान् कृपया॥

भागीरथस्य तपो मान्यं।
गङ्गावतरणं कृतवान् त्वम्॥

दानिनां मध्ये श्रेष्ठो नास्ति।
भक्तजनानां सदा सहायः॥

वेदाः अपि तव गुणान् गायन्ति।
अनादिरूपं न जानन्ति॥

समुद्रमन्थने जातं विषम्।
पीत्वा नीलकण्ठः अभवः॥

रामेण पूजितो भगवान्।
विभीषणाय लङ्का दत्तवान्॥

सहस्रकमलैः पूजां कृतवान्।
एकं नेत्रं दत्वा तुष्टवान्॥

भक्त्या प्रसन्नः शंकरः।
दत्तवान् वरं इच्छितम्॥

जय जय शिव अनन्त अविनाशी।
सर्वभूतानां अन्तरवासी॥

दुष्टाः मां सदा पीडयन्ति।
शान्तिं न लभे अहं कदाचित्॥

त्राहि त्राहि हे नाथ मम।
रक्ष मां संकटात् त्वम्॥

त्रिशूलेन शत्रून् संहर्तुम्।
मां रक्ष त्वं महेश्वर॥

माता पिता न सहायन्ते।
त्वमेव शरणं मम॥

स्वामी त्वमेव मम नाथः।
संकटात् मां उद्धर त्वम्॥

धनं निर्धनं ददासि नित्यं।
यः यच्छति सः फलम् लभते॥

स्तोतुं न शक्नोमि त्वां नाथ।
क्षमस्व मम अपराधान्॥

शंकरः संकटविनाशकः।
मङ्गलकर्ता विघ्नहर्ता॥

योगिनः ध्यायन्ति त्वाम्।
नारदः शारदा नमन्ति॥

नमो नमः शिवाय इति।
देवाः अपि न पारं गच्छन्ति॥

यः पठति श्रद्धया नित्यं।
तस्य सहायः भवसि त्वम्॥

ऋणमुक्तिः भवति तस्य।
पावनः भवति सः नरः॥

पुत्रकामः लभते पुत्रम्।
शिवप्रसादात् न संशयः॥

त्रयोदश्यां व्रतं कृत्वा।
हवनं कृत्वा शुभं भवेत्॥

नित्यं पूजां करोति यः।
तस्य दुःखं न भवति॥

धूपदीपं समर्पयेत्।
शिवं ध्यायेत् सदा भक्तः॥

पापानि नश्यन्ति सर्वाणि।
शिवलोकं स गच्छति॥

समापन दोहा

नित्यं पठेत् प्रातःकाले, शिवचालीसा भक्तः।
सर्वकामान् अवाप्नोति, शिवकृपया न संशयः॥

Most Popular Shiv Chalisa Versions

Benefits of Chanting Shiv Chalisa

1. मानसिक शांति

शिव चालीसा का पाठ मन को शांत करता है और तनाव को कम करता है।

2. बाधाओं का नाश

भगवान शिव संकटों को दूर करने वाले हैं। उनका स्मरण जीवन के कष्टों को कम करता है।

3. आध्यात्मिक उन्नति

यह स्तोत्र आत्मिक विकास और भक्ति को बढ़ाता है।

4. नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा

शिव चालीसा नकारात्मक शक्तियों को दूर करता है और सकारात्मकता बढ़ाता है।

5. इच्छाओं की पूर्ति

सच्ची श्रद्धा से पाठ करने पर इच्छाएं पूर्ण होती हैं।

6. स्वास्थ्य और संतुलन

शिव कृपा से मानसिक और शारीरिक संतुलन बना रहता है।

Understand Shiv Chalisa Better

Best Time to Chant Shiv Chalisa

सोमवार भगवान शिव का विशेष दिन है।
प्रातःकाल स्नान के बाद पाठ करना श्रेष्ठ है।
महाशिवरात्रि पर इसका पाठ अत्यंत फलदायक है।
ध्यान और पूजा के समय भी इसका पाठ किया जा सकता है।

Meaning of Shiv Chalisa

शिव चालीसा में भगवान शिव की करुणा, शक्ति और महिमा का वर्णन किया गया है।

यह बताता है कि वे दुष्टों का नाश करते हैं और भक्तों की रक्षा करते हैं।
भक्तों की प्रार्थना को स्वीकार कर उन्हें आशीर्वाद देते हैं।

Shiv Chalisa Sanskrit PDF

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FAQ – Shiv Chalisa in Sanskrit

1. क्या शिव चालीसा संस्कृत में पढ़ सकते हैं?
हाँ, संस्कृत में पढ़ना अत्यंत शुभ माना जाता है।

2. इसके क्या लाभ हैं?
मानसिक शांति, बाधा निवारण और शिव कृपा प्राप्त होती है।

3. कितनी बार पढ़ना चाहिए?
प्रतिदिन एक बार पर्याप्त है।

4. क्या सोमवार महत्वपूर्ण है?
हाँ, यह शिव पूजा के लिए विशेष दिन है।

5. क्या शुरुआती लोग पढ़ सकते हैं?
हाँ, कोई भी श्रद्धा से पढ़ सकता है।

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